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गुरुवार, 3 दिसंबर 2009

परिचय एक महापुरुष का

प्रिय मित्रों, काफ़ी समय के बाद, मैं ब्लॉग लिख रहा हूँ। बस बच्चों की बीमारी और काम की व्यस्तता के कारण समय न मिल सका। पिछली बार मैंने "एक महापुरुष का परिचय" नाम से अपना लेख संपादित किया था जिसमें मैंने पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के जीवन के कुछ उदाहरण दिये थे। साथियों आज मैं उनके द्वारा दी गई कुछ आम शिक्षाओं को प्रस्तुत कर रहा हूँ।

पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) ने अपने साथियों के चरित्र और नैतिकता के निर्माण के लिये तथा जीवन की सारी गतिविधियों को सद्धगुण से सुशोभित करने के लिये प्रथम तो स्वयं अपने चरित्र व व्यवहार को आदर्श स्वरूप पेश किया (इसे परिभाषा में “सुन्नत” कहा गया है) और शिक्षा दी कि तुम लोग इसी का अनुसरण करो, और यही सुन्नत व नमूना रहती दुनिया तक के लिये सारे इंसानों (मुसलमानों) के लिये अनुकर्णीय अनिवार्य आदर्श करार दिया गया। इसके साथ ही, एक तरफ तो क़ुर्आन की शिक्षाओं को खोल खोलकर लोगों को बताया, दूसरी तरफ स्वयं अपनी ओर से भी, जीवन भर अपने अनुयायियों को शिक्षाएं देते रहे। उनमें से कुछ आम शिक्षाएं यहाँ प्रस्तुत हैः
1) तुममें सबसे अच्छा वह है अख़लाक़ (दूसरों के प्रति व्यवहार) सबसे अच्छे हों।
2) अपनी औरतों के साथ अच्छे से अच्छा सुलूक करो। वो आबगीनों (पानी के बुलबुलों) की तरह नाज़ुक होती हैं।
3) तुममें सबसे अच्छा वह है जो अपने से छोटों से प्रेम और बड़ों के साथ आदर के साथ पेश आए।
4) किसी व्यक्ति को दान दो तो दिखावा मत करो, इतनी ख़ामोशी से दो कि दायां हाथ दे तो बाएं हाथ को पता न चले। किसी बड़े सामाजिक, सामूहिक हित के अवसर पर दान दो तो खुले, एलानिया दो ताकि दूसरों को भी प्रेरणा मिले।
५) वह सच्चा इमान वाला (मुस्लिम) नहीं है जिसके पड़ोस में कोई व्यक्ति/परिवार निर्धनता-वश भूखा रहे और वह पेट भर खाना खाकर सोए.
६) मजदूर की मजदूरी उसका पसीना सूखने से पहले दे दो.
७) परलोक जीवन (में सफलता) की तैयारी इसी जीवन में कर लो.
८) बुढ़ापा आने से पहले जवानी को गनीमत जानो, बीमारी आने से पहले स्वास्थ को गनीमत जानो, गरीबी आने से पहले धन-सम्पन्नता को गनीमत जानो, मौत आने से पहले ज़िन्दगी को गनीमत जानो (अर्थात इन सब का अधिकाधिक उपयोग सत्कर्म, इशोपसना, इशाग्यपालन में कर लो).
९) तुम में से हर कोई दूसरों के लिए वही पसंद करे जो स्वयं अपने लिए पसंद करता है.
१०) रास्ते से कष्टदायक चीजें (जैसे पत्थर कांटा आदि) हटा दिया करो, ये इबादत है.
११) जिसका वस्त्र हराम, नाजायज़ मॉल (जैसे चोरी, डकैती, ब्याज,रिश्वत, गबन, जुआ, शराब के कारोबार, धोकाधड़ी, जमाखोरी, कम नाप तौल, अवैध व्यापार, अवैध वस्तुओं की बिक्री, झूठ फरेब आदि) से बना हो और जिसका शरीर ऐसे माल से पल रहा हो, उसकी दुआएं अल्लाह हरगिज़ क़ुबूल नहीं करता.

मित्रो: ये थी प्यारे नबी मोहम्मद (सल्ल.) की कुछ आम शिक्षाएँ जिन्हें वो संसार के हर मनुष्य तक पहुचाना चाहते थे. उनकी ये तड़प थी कि इस संसार में शांती स्थापित हो और मनुष्य मनुष्य की गुलामी से निकल कर सिर्फ उस एक पालनहार, कर्ता और रचयिता की गुलामी में लग जाये जो कि इस पूरी श्रष्टि का मालिक है और वही उपासना के लायक है. उनकी ये तड़प उनके जीवन की आखिरी साँस तक रही.
अपनी अंतिम सासों में भी वो अपने अनुयायिओं के लिए प्रार्थना करते रहे और उन्हें संसार में शांति सन्देश फैलाने और शांति स्थापित करने के लिए कहते रहे.
साथियों आज बस इतना ही अगर ऊपर वाले ने चाहा तो अगले अंक में मैं इस महापुरुष के जीवन की कुछ और झलकियाँ प्रस्तुत करूंगा

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