यदि सब लोग एक ईश्वर के नियमानुसार जीवन बिताना शुरू कर दें तो स्वयं पूरे समाज में शान्ति स्थापित हो सकती है।
आज विभिन्न धर्मों का धरती पर पाया जाना और हर धर्म के मानने वालों का स्वयं को उत्तम सिद्ध करना ही समाज, देश और समुदाय के लिए हानीकारक साबित हो रहा है। अगर लोगों ने अपने ईश्वर के बताए हुए नियम को अपनाया होता तो सम्पूर्ण संसार एक कुटुम्ब के समान हो सकता था। ईश्वर ने ही मानव को तुच्छ वीर्य से पैदा किया, धरती पर बसाया, बुद्धि ज्ञान दिया,हर प्रकार का उस पर उपकार किया, तो क्या आप समझते हैं कि उसने अपने उद्देश्य से मानव को अवगत न किया ? जिस प्रकार एक कम्पनी कोई सामान बनाती है तो उसके प्रयोग करने का नियम भी बताती है उसी प्रकार ईश्वर ने मानव को पैदा किया तो जीवन बिताने का उन्हें एक जीवन व्यवस्था भी दिया, जिसे उसने संदेष्टाओं ने (जिनकी संख्या 124000 तक पहुंचती है)हर युग और हर देश में मानव तक यह संदेश पहुंचाया कि तुम्हारा ईश्वर तुम से क्या चाहता है, उन सब का संदेश एक ही था कि एक ईश्वर की पूजा की जाए,धरती को परीक्षास्थल समझा जाए, और सम्पूर्ण मानव से अच्छा व्यवहार किया जाए। सब से अन्त में यही संदेश अन्तिम अवतार (जिनकी आज हिन्दू लोग प्रतीक्षा कर रहे हैं) के द्वारा ईश्वर ने कुरआन के रूप में सम्पूर्ण संसार के लिए उतारा। जिसका सम्बोधन प्रत्येक मानव जाति से है। बस आवश्यकता है कि आप इस्लाम का अध्ययन कर के देखें। आप पाएंगे कि यह मुसलमानों की सम्पत्ति नहीं जैसा कि ताब्दियों से कहा जा रहा है बल्कि यह तो सारे मानव के लिए उसके ईश्वर का उपहार है।

बहुत बेहतर
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छा ब्लौग है बस आवश्यकता है कि आप इस पर पोस्ट करते रहें। बहुत बहुत बधाई।
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